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लू लगना और हीट स्ट्रोक: माता-पिता क्या करें?
गर्मी में लू लगने पर बच्चे को ठंडा करें और पानी दें; हीट स्ट्रोक एक आपात स्थिति है।
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यह क्या है
गर्म मौसम में, खासकर जब हवा में नमी बहुत ज़्यादा हो, पसीना आना शरीर को ठंडा करने के लिए काफी नहीं होता। तब शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है और गर्मी से जुड़ी बीमारी हो सकती है [6]। ज़्यादातर मामले तब होते हैं जब कोई व्यक्ति बहुत देर तक गर्मी में रहता है; तेज़ गर्मी में कसरत करना या बाहर काम करना भी इसका कारण बन सकता है [6]।
गर्मी से जुड़ी बीमारियों में हीट स्ट्रोक, हीट एग्ज़ॉशन (लू लगना), हीट क्रैम्प्स और हीट रैश शामिल हैं [6]। हीट एग्ज़ॉशन के लक्षण वयस्कों और बच्चों में अक्सर एक जैसे होते हैं [1]। अगर 30 मिनट के भीतर शरीर ठंडा हो जाए, तो आमतौर पर आपातकालीन इलाज की ज़रूरत नहीं होती; लेकिन अगर यह हीट स्ट्रोक में बदल जाए, तो इसे आपात स्थिति मानकर इलाज कराना ज़रूरी है [1]।
लू लगने के लक्षण: थकान, चक्कर आना, सिरदर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना, बहुत ज़्यादा पसीना आना और त्वचा का पीला और चिपचिपा हो जाना (भूरी या काली त्वचा पर रंग बदलना पहचानना कठिन हो सकता है), हाथों, पैरों और पेट में ऐंठन, तेज़ तापमान, बहुत ज़्यादा प्यास लगना और चिड़चिड़ापन [1]।
हीट स्ट्रोक के लक्षण: बहुत तेज़ तापमान, बिना पसीने के गर्म त्वचा, तेज़ सांस और तेज़ धड़कन, भ्रम और बेचैनी, दौरा (फिट), और बेहोशी [2]। हीट स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात स्थिति है — तुरंत मदद लें [2]।
घर पर आप क्या कर सकते हैं
अगर किसी को लू लगी है, तो ये 4 कदम उठाएँ [5]:
- उसे ठंडी जगह पर ले जाएँ।
- जैकेट या मोज़े जैसे गैर-ज़रूरी कपड़े उतार दें।
- उसे भरपूर पानी पिलाएँ — आइसोटोनिक स्पोर्ट्स ड्रिंक या पानी में मिलाया जाने वाला ओरल रीहाइड्रेशन पाउडर भी दे सकते हैं, जो पसीने से निकले नमक की भरपाई में मदद करता है।
- त्वचा ठंडी करें — ठंडे पानी का छिड़काव या स्पंज करें और पंखा चलाएँ। कपड़े में लपेटकर बगल में या गर्दन पर ठंडे पैक रखना भी अच्छा है।
- उसके ठीक होने तक उसके साथ रहें। 30 मिनट के भीतर वह ठंडा होने लगेगा और बेहतर महसूस करेगा।
गर्मी से बचाव के लिए ठंडे पेय ज़्यादा पिएँ, खासकर अगर सक्रिय हैं या कसरत कर रहे हैं; हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें; सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक धूप से बचें; बहुत ज़्यादा शराब न पिएँ; और अत्यधिक कसरत से बचें [3]। बहुत गर्म दिन में घर के अंदर हों तो पर्दे बंद करें, और अगर बाहर घर से ज़्यादा गर्म है तो खिड़कियाँ बंद रखें तथा गर्म होने वाले बिजली के उपकरण और लाइटें बंद कर दें [3]। बच्चों, बड़ी उम्र के लोगों और डायबिटीज़ या दिल की समस्या जैसी दीर्घकालिक बीमारियों वाले लोगों पर ध्यान रखें, क्योंकि उनमें जोखिम ज़्यादा होता है [3]। बड़ी उम्र के लोग, छोटे बच्चे, और जो बीमार या ज़्यादा वज़न वाले हैं, उनमें जोखिम सबसे अधिक होता है; कुछ दवाएँ लेना या शराब पीना भी जोखिम बढ़ा सकता है [6]।
डॉक्टर के पास या इमरजेंसी कब जाएँ
अगर हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत मदद लें [2]। मदद आने तक व्यक्ति को ठंडी, गीली चादर में लपेटें, या उसे पंखा करें या ठंडे पानी से स्पंज करें [4]। अगर वह बेहोश हो जाए, तो उसे रिकवरी पोज़िशन में लिटाएँ और एम्बुलेंस सेवा को बताएँ; उसकी सांस और नाड़ी जाँचें और जीवन के कोई संकेत न दिखने पर सीपीआर करें [4]।
तुरंत आपातकालीन मदद लें अगर [5]:
- ठंडी जगह में आराम करने, शरीर ठंडा करने और तरल पदार्थ पीने के 30 मिनट बाद भी हालत ठीक न हो।
- बहुत तेज़ तापमान हो।
- त्वचा गर्म हो और पसीना न आ रहा हो, और लाल दिख सकती हो (भूरी या काली त्वचा पर यह पहचानना कठिन हो सकता है)।
- धड़कन तेज़ हो।
- सांस तेज़ हो या सांस फूल रही हो।
- भ्रम हो और शरीर में तालमेल न बैठ रहा हो।
- दौरा (फिट) पड़े।
- बेहोशी हो जाए।
खुद गाड़ी चलाकर आपातकालीन विभाग न जाएँ; अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें और वहाँ से मिली सलाह मानें [5]। अगर लू लगने के लक्षणों को संभालना मुश्किल हो रहा हो या सलाह चाहिए हो, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें [5]।
आम सवाल
क्या लू लगना अपने आप ठीक हो जाता है? अगर 30 मिनट के भीतर शरीर ठंडा हो जाए, तो आमतौर पर आपातकालीन इलाज की ज़रूरत नहीं होती [1]।
क्या यह हीट स्ट्रोक बन सकता है? हाँ, अगर लू लगने का इलाज न किया जाए तो यह हीट स्ट्रोक में बदल सकता है [6]।
बच्चों में लक्षण अलग होते हैं? हीट एग्ज़ॉशन के लक्षण वयस्कों और बच्चों में अक्सर एक जैसे होते हैं [1]।
हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान कितना हो सकता है? यह मिनटों में 106 °F (41 °C) से ऊपर पहुँच सकता है [6]।
स्रोत
[1] NHS — “Heat exhaustion and heatstroke” (2026), खंड “Heat exhaustion and heatstroke”, पृ. 1 — https://www.nhs.uk/conditions/heat-exhaustion-heatstroke/ [2] NHS — “Heat exhaustion and heatstroke” (2026), खंड “Symptoms of heatstroke”, पृ. 1 — https://www.nhs.uk/conditions/heat-exhaustion-heatstroke/ [3] NHS — “Heat exhaustion and heatstroke” (2026), खंड “Preventing heat exhaustion and heatstroke”, पृ. 1 — https://www.nhs.uk/conditions/heat-exhaustion-heatstroke/ [4] NHS — “Heat exhaustion and heatstroke” (2026), खंड “What to do while waiting for help with heatstroke”, पृ. 1 — https://www.nhs.uk/conditions/heat-exhaustion-heatstroke/ [5] NHS — “Heat exhaustion and heatstroke” (2026), खंड “Things you can do to cool someone down”, पृ. 1 — https://www.nhs.uk/conditions/heat-exhaustion-heatstroke/ [6] MedlinePlus — “Heat Illness” (2024), पृ. 1 — https://medlineplus.gov/heatillness.html
यह गाइड प्रकाशित बाल रोग दिशानिर्देशों का सार देती है। यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है और आपके बाल रोग विशेषज्ञ की जगह नहीं लेती। आपात स्थिति में अपने इलाक़े के आपातकालीन नंबर पर फ़ोन कीजिए।
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