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क्या मेरे बच्चे को एंग्ज़ाइटी है?
बच्चों में चिंता के लक्षण, घर पर मदद के तरीके और डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।
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यह क्या है
चिंता (एंग्ज़ाइटी) खतरे या चुनौती की स्थिति में शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, और कभी-कभी इसे महसूस करना जीवन का सामान्य हिस्सा है [1]. यह तब समस्या बन जाती है जब रोज़मर्रा की स्थितियों में तीव्र, अत्यधिक और लगातार चिंता और डर दिखे, जो दैनिक गतिविधियों में बाधा डालें [1].
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, चिंता विकार किशोरों में सबसे आम भावनात्मक विकार हैं, और ये बड़े किशोरों में छोटे किशोरों की तुलना में अधिक पाए जाते हैं [6]. अनुमान है कि 10-14 साल के 4.1% और 15-19 साल के 5.3% किशोर चिंता विकार से पीड़ित हैं [6]. दुनिया भर में 10-19 साल के हर सात में से एक युवा को कोई न कोई मानसिक विकार है [7].
चेतावनी के संकेतों में शामिल हैं [2]:
- आसन्न खतरे, घबराहट या आपदा की भावना
- घबराहट, बेचैनी या तनाव महसूस होना
- ध्यान केंद्रित करने या सोने में कठिनाई
- दिल की धड़कन का तेज़ होना
- सीने में दबाव या दर्द
- कमज़ोरी या थकान महसूस होना
- तेज़ साँस लेना, पसीना आना, कंपकंपी, नर्वस टिक्स, सिरदर्द, पेट दर्द
घर पर आप क्या कर सकते हैं
SEUP (स्पेनिश पीडियाट्रिक इमरजेंसी सोसाइटी) के अनुसार, आप अपने बच्चे की मदद के लिए ये कदम उठा सकते हैं [3]:
- बच्चे को अपनी भावनाएँ और डर बताने दें, सुनने की जगह दें। बात करने से चिंता कम होती है।
- दिनचर्या बनाएँ — पढ़ाई, खेल और नींद के लिए नियमित समय रखें, इससे अनिश्चितता घटती है।
- शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त आराम को बढ़ावा दें।
- अगर तेज़ साँस लेने (हाइपरवेंटिलेशन) के साथ हाथ-पैर या चेहरे में झुनझुनी और चक्कर आए, तो बच्चे को पेपर बैग में साँस लेने दें।
- विश्राम तकनीकें सिखाएँ, जैसे स्क्वायर ब्रीदिंग या जैकबसन की प्रगतिशील विश्राम विधि।
- धैर्य रखें — चिंता एक दिन में नहीं जाती, ठीक होने में समय लग सकता है।
परिवार के सदस्य के रूप में भी आप मदद कर सकते हैं [5]:
- सुरक्षित और शांत माहौल दें, बिना जज किए।
- “शांत हो जाओ” कहने से बचें — यह उल्टा असर कर सकता है और चिंता बढ़ा सकता है।
- उनकी भावनाओं को मान्यता दें, छोटा न समझें। “मैं समझता/समझती हूँ कि यह तुम्हें बहुत परेशान कर रहा है, क्या तुम इसके बारे में और बात करना चाहते हो?” जैसी बातें कहें।
- संकट के समय साथ रहें — “अगर तुम्हें मेरी ज़रूरत हो, मैं यहाँ हूँ, तुम अकेले नहीं हो” जैसे वाक्यों से समर्थन दिखाएँ।
डॉक्टर के पास या इमरजेंसी कब जाएँ
अगर नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी विभाग से संपर्क करें [4]:
- ऐसे लक्षण जो पहले कभी नहीं दिखे और बहुत तीव्र हों, जैसे साँस लेने में समस्या, दिल की धड़कन का बहुत तेज़ होना या सीने में दर्द।
- अगर बच्चे को कोई दिल या साँस की बीमारी है जो समान लक्षण पैदा कर सकती है — इमरजेंसी में जाकर जाँच कराएँ कि यह कोई शारीरिक जटिलता तो नहीं।
- अगर पहले से कारगर तकनीकों को आज़माने के बावजूद तीव्र चिंता के लक्षण बने रहें।
WHO के अनुसार, शुरुआती पहचान और इलाज बहुत ज़रूरी है — अनुपचारित मानसिक विकार वयस्कता तक असर दिखाते हैं और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाते हैं [7]. इलाज में दवाओं पर अत्यधिक निर्भरता से बचना और गैर-दवा समाधानों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है [9].
आम सवाल
क्या चिंता किशोरों में आम है? हाँ। WHO के अनुसार, चिंता विकार किशोरों में सबसे आम भावनात्मक विकार हैं [6]. दुनिया भर में 10-19 साल के 15% युवाओं में कोई न कोई मानसिक विकार पाया जाता है [7].
क्या चिंता और अवसाद एक साथ हो सकते हैं? हाँ। WHO के अनु
स्रोत
[1] SEUP — “Ansiedad. Información para padres” (2025), खंड “¿QUÉ ES LA ANSIEDAD?”, पृ. 1 [2] SEUP — “Ansiedad. Información para padres” (2025), खंड “GUÍA INFORMATIVA PARA LA DETECCIÓN, PREVENCIÓN Y MANEJO DE LA ANSIEDAD”, पृ. 1 [3] SEUP — “Ansiedad. Información para padres” (2025), खंड “Signos y síntomas”, पृ. 2 [4] SEUP — “Ansiedad. Información para padres” (2025), खंड “SE RECOMIENDA ACUDIR AL SERVICIO DE URGENCIAS PEDIÁTRICAS DE LA ZONA EN CASO”, पृ. 2 [5] SEUP — “Ansiedad. Información para padres” (2025), खंड “EN EL CASO DE UN FAMILIAR, ¿CÓMO PUEDO AYUDAR A LA PERSONA SI DETECTO ESTAS SEÑALES?”, पृ. 1 [6] WHO — “La salud mental de los adolescentes”, खंड “Trastornos emocionales”, पृ. 1 — https://www.who.int/es/news-room/fact-sheets/detail/adolescent-mental-health [7] WHO — “La salud mental de los adolescentes”, खंड “Datos y cifras”, पृ. 1 — https://www.who.int/es/news-room/fact-sheets/detail/adolescent-mental-health [9] WHO — “La salud mental de los adolescentes”, खंड “Detección y tratamiento tempranos”, पृ. 1 — https://www.who.int/es/news-room/fact-sheets/detail/adolescent-mental-health
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