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बच्चे को बेहोशी (सिंकोप) क्यों आती है और क्या करें?
बेहोशी अचानक और थोड़े समय के लिए होती है; ज़्यादातर बच्चे कुछ मिनट में ठीक हो जाते हैं।
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यह क्या है
सिंकोप यानी बेहोशी या बेहोश हो जाना, चेतना का अचानक और कम समय के लिए चला जाना है [2]। यह आमतौर पर तब होता है जब दिमाग तक पर्याप्त खून या ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती [2]। कुछ स्थितियाँ इसे बढ़ावा देती हैं: बहुत ज़्यादा गर्मी, दर्द, डर, घबराहट या चिंता, लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहना, या लेटे हुए अचानक उठ जाना [2]। कम आम कारणों में शुगर का गिर जाना (डायबिटीज़ वाले बच्चों में), कुछ ज़हरीली चीज़ें, दिल की बीमारियाँ और पानी की कमी शामिल हैं [2]। बेहोशी से पहले बच्चा पीला पड़ सकता है, जवाब देना बंद कर सकता है और ताकत खोकर गिर सकता है; कभी-कभी बेहोश होते समय हाथ-पैरों में 2-3 झटके आ सकते हैं [1]। आमतौर पर बेहोशी से पहले बच्चे को जी मिचलाना, धुंधला दिखना, पेट में दर्द, पसीना आना या कानों में सनसनाहट महसूस हो सकती है [1]। ये लक्षण आगे चलकर बच्चे को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि क्या होने वाला है, ताकि वह नई बेहोशी से बच सके [1]। आमतौर पर ये गंभीर चिकित्सीय समस्याओं से नहीं होतीं और इनके लिए किसी खास जाँच की ज़रूरत नहीं होती; बेहोशी कोई बीमारी नहीं है [3]।
घर पर आप क्या कर सकते हैं
- जब बच्चा बेहोशी से पहले बेचैनी महसूस करे, तो उसे तुरंत बैठा दें या लिटा दें, ताकि बेहोशी और गिरने से बचा जा सके; अक्सर स्थिति बदलना ही बेहोशी का इलाज है [4]।
- उसे धीरे और गहरी साँस लेने के लिए कहें [4]।
- अगर बच्चा बेहोश हो जाए, तो उसे पैर ऊँचे करके लिटाना बेहतर है और सिर को एक तरफ कर दें ताकि साँस अच्छे से चले [4]।
- जब तक बेचैनी या कमज़ोरी खत्म न हो, बच्चे को उठने न दें; लेटा हो तो पहले बैठे और कुछ मिनट बाद धीरे-धीरे खड़ा हो [4]।
- बेहोशी की जानी-पहचानी वजहों से बचें या उन्हें बदलें, जैसे बैठे या लेटे हुए अचानक न उठें [3]।
- अगर खून निकालते समय बच्चा चकराने लगता है, तो पहले ही बता दें ताकि उसे लिटाकर खून निकाला जाए [3]।
- जिन बच्चों को बेहोशी की प्रवृत्ति हो, उन्हें ज़्यादा तरल पदार्थ पीना चाहिए, खासकर शारीरिक गतिविधि के समय [3]।
- आराम के बाद बच्चे आमतौर पर कुछ ही मिनटों में तेज़ी से ठीक हो जाते हैं [4]।
डॉक्टर के पास या इमरजेंसी कब जाएँ
- अगर बच्चे को होश में आने में 3-5 मिनट से ज़्यादा लगें; तब उसे सुरक्षित करवट की स्थिति में लिटाएँ और अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें [5]।
- अगर बेहोशी शारीरिक गतिविधि या ज़ोर लगाने के दौरान हुई हो, या बैठे हुए हुई हो [5]।
- अगर इस दौरान धड़कन तेज़ महसूस हुई हो, सीने में दर्द हुआ हो, हाथ-पैरों में झटके आए हों, या अंत में बच्चे ने अनजाने में पेशाब कर दिया हो [5]।
- बेहोशी के बाद डॉक्टर से मिलकर यह पता लगाना ज़रूरी है कि ऐसा क्यों हुआ [6]।
आम सवाल
क्या बेहोशी के बाद बच्चे को लेटा रहना चाहिए? जब किसी को बेहोशी आए, तो सुनिश्चित करें कि साँस की नली खुली है और साँस चल रही है; व्यक्ति को 10-15 मिनट तक लेटा रहना चाहिए [6]।
क्या बेहोशी खतरनाक है? ज़्यादातर लोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं और बेहोशी आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती, लेकिन कभी-कभी यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है [6]।
क्या बेहोशी होने पर किसी खास जाँच की ज़रूरत होती है? आमतौर पर ये गंभीर चिकित्सीय समस्याओं से नहीं होतीं और इनके लिए किसी खास जाँच की ज़रूरत नहीं होती [3]।
स्रोत
[1] SEUP — “Síncope. Información para padres” (2025), खंड “¿CUÁLES SON LOS SÍNTOMAS?”, पृ. 1 [2] SEUP — “Síncope. Información para padres” (2025), खंड “¿QUÉ ES UN SÍNCOPE? ¿POR QUÉ SE PRODUCEN?”, पृ. 1 [3] SEUP — “Síncope. Información para padres” (2025), खंड “¿CÓMO LOS PODEMOS PREVENIR?”, पृ. 2 [4] SEUP — “Síncope. Información para padres” (2025), खंड “¿QUÉ PODEMOS HACER EN CASA CUANDO UN NIÑO O NIÑA SUFRE UN SÍNCOPE?”, पृ. 1, 2 [5] SEUP — “Síncope. Información para padres” (2025), खंड “¿CUÁNDO DEBEMOS CONSULTAR EN UN SERVICIO DE URGENCIAS?”, पृ. 2 [6] MedlinePlus — “Fainting” (2025), पृ. 1 — https://medlineplus.gov/fainting.html
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